पल्मोनरी फाइब्रोसिस फेफड़ों की एक दुर्लभ बीमारी है जो फेफड़ों में गंभीर घाव का कारण बनती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ और लगातार खांसी हो सकती है और समय के साथ यह बदतर होती जाती है। क्योंकि इसका कोई इलाज नहीं है। *पल्मोनरी फाइब्रोसिस का निदान रोगियों और देखभाल करने वालों दोनों के लिए बहुत ज़रूरी है।*
*लक्षण*
खांसी जिसमें बलगम आता है, घरघराहट या सीने में जकड़न। थकावट, तीव्र ब्रोंकाइटिस या निमोनिया जैसे फेफड़ों के संक्रमण का बार-बार होना।
*फेफड़ों में इन्फेक्शन के लक्षण क्या है?*
खांसी के साथ बलगम और ब्लड आने की समस्या, सांस लेने में समस्या होना, सीने में दर्द होना,मांसपेशियों में दर्द होना,गले में दर्द होना,घरघराहट की समस्या, थोड़े काम या सामान्य क्रिया से जल्दी थकान होना,उल्टी-दस्त के साथ जी मिचलाना।
*जाँच/ कैसे पता लगायें?*
थ्री बॉल्स स्पाइरोमीटरसे जांच : सांस की क्षमता को जांचने और बढ़ाने में 'थ्री बॉल्स स्पाइरोमीटर' का इस्तेमाल भी कारगर है। इसमें एक पाइप होता है और 3 प्लास्टिक की हल्के बॉल। पाइप में फूंक मारनी होती है। अगर किसी के फूंकने से तीनों बॉल ऊपर उठ जाती हैं तो समझें उनके फेफड़ों की क्षमता अच्छी है।
जब हालत गंभीर हो जाए तो दुनिया की ज्यादातर सघन चिकित्सा इकाइयों में रोगी को श्वसन की कृत्रिम मशीनों या वेंटीलेटर से जोड़ दिया जाता है। इसमें रोगी के ट्रेकिया यानी विंडपाइप में ट्यूब डाल दी जाती है और फिर पॉजिटिव प्रेशर वेंटीलेशन शुरू हो जाता है।
फेफड़ों में जमा गंदगी को खींचकर बाहर कर देते हैं।
*ये 10 सुपरफूड जिसकी मदद से फेफड़ों की सफाई हो जाती है!*
1- हल्दी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हल्दी में एंटीबैक्टीरियल, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीकैंसर के गुण होते हैं। 2- टमाटर, 3- चुकंदर, 4- ब्रोकली, 5- मिर्च, 6-पत्तेदार साग, 7- कद्दू, 8- ब्लू बेरीज इत्यादि फल आपको पल्मोनरी फाइब्रोसिस से बचाते हैं।*(ए.के.अरुण,हील इनिशिएटिव)*